आजकल जहां देखो वहीं विज्ञापनों का संसार दिखाई देता है. आज चाहे आप किसी भी रास्ते से चलिए आपको जगह जगह विज्ञापन जरूर दिखेंगे. इन्हीं विज्ञापनों की लिस्ट में आज हमें इंटरनेट पर एक ऐसा विज्ञापन देखने को मिला जिसे पढ हम तो लोट-पोट हो गए तो चलुइए आप भी हो जाइयें लोटपोट.

 

 

8665-8666दुल्हा चाहिए!


 

 

 

मान्यवर मुझे दूल्हे बाजार से

 

एक दामाद चाहिए

 

जो अक्ल का अंधा हो

 

झकमारना जिसका धंधा हो

 

दांत निपोरनेवाला बंदा हो

 

जाति पर कोई जोर नहीं

 

गंजेड़ी- भंगेड़ी से बैर नहीं

 

पर थोड़ा दिलवाला हो

 

दुम हिलाने वाला हो

 

उसे किसी बात का गुरेज न हो

 

खाना पकाने से परहेज न हो

 

उसे किसी बात का गुमान न हो

 

थोड़ा सा स्वाभिमान न हो

 

अब लड़की के बारे में बताते हैं

 

हम अपनी बात पर आते हैं

 

लड़की की राषि कुंभ है

 

उसे अपने आप पर दंभ है

 

वह घर में बैठकर पति को खिलाएगी

 

यानी एक जाहिल को जिलाएगी

 

जिसको जीवन में आराम चाहिए

 

बिना कुछ किए पकवान चाहिए

 

उसको तो यह धाम चाहिए

 

लड़की काम करने में अक्षम है

 

पर मुंह चलाने में सक्षम है

 

वह बात-बात में पति को झिड़केगी

 

सिर्फ जान नहीं और सब पति पर छिड़केगी

 

लड़की चलने में थोड़ी झुकती है

 

बोलने में रूकती है

 

उसे पुरूष जाति पर ऐतवार नहीं

 

उसके सर पर बाल नहीं

 

वह काफी मोटी-तगड़ी है

 

पर एक पैर से लंगड़ी है

 

उसे एक छत्र राज चाहिए

 

महल नहीं ताज चाहिए

 

सासू मां को वनवास चाहिए—————————————–

—————————————————————————–अग्यात

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